Tamil Nadu’s political warfare- All that you need to know.

What is all the chaos about?
After the demise of Jayalalitha, former CM of Tamil Nadu, O Paneerselvam was appointed as the chief minister of the state. He also played the role of the CM, for the AIDMK party when Jayalalitha had fallen ill.  Lately, after the growing following of Shashikala, who was recently appointed as the party head,  O Paneerselvam was expected to resign from the post of Chief Minister so as to pave the way for crowning of Shashikala. Though,the turmoil started on 7th February when OPS “claimed” that he was “pressurized” to resign from the CM’s post after a short meditation at Jayalalitha’s memorial.  OPS also claimed that it was Jayalalitha’s wish that he was to continue as the CM of the state. 

Who is O Paneerselvam?

O Paneerselvam is a member of AIDMK (All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam) party and a loyalist of its leader, Jayalalitha. He has worked his way to top in AIDMK, from being a young ground level party worker to the Chief Minister of the state. 

Who is Sashikala Natrajan?

Sashikala Natrajan , was a close aide to Jayalalitha and is presently the general secretary of AIDMK. She was unanimously chosen as party head after the death of Jayalalitha. 

What lies ahead for Tamil Nadu?

Tamil Nadu as a state, is burning. Be it the ugly face of LTTE rising in wake of Jallikattu protests or anti national slogans during Marina Beach, the state with all its people is suffering.A split in AIDMK means re elections which would inturn yet again make the common man suffer. For Tamil Nadu its way too many wars at a time, be it demand for exemtion from NEET or the latest revolt by O Paneerselvam. 

Are we becoming a cult? The difference between following a leader and worshiping him.

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“We don’t need another god among us. We need a leader. We need to be follower and not a devotee.There is a difference between being a follower and a devotee. “

I noticed something unique in this entire demonetization row. The political warfare was taken to another level by the social media. Psychological games were at their peak, be it in form of a Whatsapp message or a sarcastic joke in form of meme  . The united opposition left no stone unturned to corner the government. “Jan Jan Ki Baat” survey undertaken by Prime Minister Narendra Modi seemed much more like an effort to woo the public and persuade them to unsee the faults in the implementation of currency ban. However, all these don’t even come close to something else. I saw rise of a cult. A cult where people have already proclaimed Narendra Modi as their god.

Narendra Modi is no god. He is a political leader. Gods aren’t answerable for what they do but leaders are.

It is not about the pros and cons of currency ban. The discussion here is about the attitude that we as citizens are developing. When  you follow a leader, you see the positive and negative effects of the decisions which he takes but once you proclaim him as a god, there is only one direction- submission to his will. The cult doesn’t ask questions. The cult only follows. We need to ask questions. Genuine questions.

Now imagine a cult comprising of more than tens of million people and imagine their proclaimed god making a mistake. Their is this Mr C who knows the solution to the mistake made by the god. Mr C can help the god make amendments so as for better good, but when he questions him, the cult fanatics denounces Mr C. They cant tolerate their god being questioned. Such cant happen when we have a leader. Democracy requires good leaders.

 

“वो बूझी हुई सिगरेट…

सालों बाद आज वो घर को आया था। इन MNC’s का चककर ही ऐसा होता है। और विदेश की लालसा भी अलग ही होती है। कुछ चिजें कभी नहीं बदलती। उनका अस्तित्व और उनकी खूबसूरती दोनों ही उनके न बदलने में है।

अब जैसे की उसका वो मुहल्ला। Globalization की कोई छाप नहीं पड़ी थी वहाँ। सब कुछ ज्यों का त्यों। Sharma आंटी को आज भी लौंडे “Hippo” केह कर चिड़ा रहे थे। Das अंकल आज भी अपनी वही पुरानी Fiat को जान लगा कर चमका रहे। पुरानी पुलिया पर लौंडे आज भी चिलम पि रहे थे। न जाने उन्हें “Malboro” और “Gold Flake” के अस्तित्व का पता भी था कि नहीं।

कुछ भी नहीं बदला था उन 4 सालों में। या शायद कुछ बदल चुका था। बदल चुकी थी वो …

कैसी दिखती होगी अब? शादी हो गयी होगी क्या? कहीं मोटी तो नहीं हो गई होगी? न जाने अपने बालों को कैसा करवा लिया होगा। मुझे पहचानेगी ?, न ही पहचाने तो बेहतर। अभी भी चश्मा लगाती होगी? न जाने कैसी होगी ।

इन खयालों में डुबा, उसने नूकड़ कि दुकान से एक सिगरेट ली, और “काके की दुकान” के तरफ बड़ गया।  चाहे कुछ भी बदल जाए एक इंसान कि जिंदगी में, लत कभी नहीं बदलती। उसे भी लत लग चूकी थी, एक सिगरेट और दूसरी उसकी। फर्क बस इतना था कि एक उसे छोड़ती नहीं और दूसरी उसे मिलती नहीं।

वो काके के यहाँ पहुँचा ही था कि मानो समय अचानक रुक सा गया हो । सामने उसके वो थी।
आज भी उसकी बोली में वही एक अनकही सी मिठी रौब थी। चश्मे आज भी वही काले रंग के Full Frame। बाल उसके आज भी वैसे ही पुरे Straightened । हाँ, ईश्वर ने पुरा Summer Vacation खर्च कर उसे बनाया था और बनाने के बाद उस सांचे को तोड़ दिया था।

….अचानक से उसकी नज़र, दुकान के बाहर खड़े एक लड़के पर पड़ी। ये… क्या मैं कोई सपना देख रही? क्या ये वहीं है? उंगलियों में दबी एक सिगरेट, Casual से Trousers और एक Formal सी T-shirt। लग तो वही रहा। शरीर का तो कोई खयाल ही नहीं है। कितना दुबला हो गया है। पता नहीं खाना भी ढंग से खाता की नहीं।

“कैसी हो?”
“तुमसे मतलब? अपनी तबीयत देखो,Scarecrow  से लग रहे हो!”
“Oh… शादी कर लि क्या ?”
“सिगरेट पिना छोड़ दिया क्या?”
“ये लो बुझा देता हूँ.. अब बताओ  शादी कर ली?”
“ये सवाल पुछने का तुम्हें कोई हक नहीं”
“है..”
“नहीं, नहीं हुई है शादी…”

और तभी न जाने कहाँ से कोई China Mobile बज पड़ा,

“तेरे बिन जिंदगी से कोई शिकवा तो नहीं, शिकवा नहीं,
तेरे बिना, जिंदगी भी लेकिन जिंदगी तो नहीं…..”  ❤  ❤

“तेरा इश्क ……एक आखिरी बार..

मेरे दोस्तों की आपस में शर्त लग रही थी।

“ये उसके तरफ 10 मीटर जा कर वापस आ जाएगा, क्या कहता है बे, Bet लगाएगा?”
“हाँ BC Bet Done! पुरे 2 समोसे का। मैं कहता हूँ की 5 मीटर चल कर ही वापस आ जाएगा”

उस दिन अगर वो मेरे दोस्त न होते तो शायद मैं आज खून करने के जुर्म में Jail में होता।

Valentine’s Day की बात है। 11वीं में थे हम।

याद है मुझे, मेरी दिन की शुरूआत तब ही होती,जब तुम सुबह के Assembly में PLEDGE बोलने को Stage पे आती।
दायें हाथ से Mic पकड़ती और अपने बायें हाथ से अपने बालों के उस दो लटों को धिरे से अपने गोरे—गोरे गालों पर से खिसकाकर अपने कानों पे डाल दीया करती । हाये हाये…कसम महादेव की जी करता था जा कर Srivastav Sir की Pappi ले लूँ, “वाह Sir, क्या बवाल बेटी पैदा किए हो। Too Good”

कहने को तो मैं Science का था। मगर न जाने क्यों हम “ECONOMICS” की किताबों का तकिया बनाये सोया करते थे। Debit-Credits में दिलचस्पी बड़ गई थी हमारी। ये सब तुम्हारा ही जादू था।

अपने Delhi वाले मौसेरे भाई से पुरी Detailing ले रखी थी Valentine’s Week की हमने। सब कुछ Perfect होना चाहिए।

“सुनो बे गधे, “गुलाब” देना होता है दिल की बात कहते वक्त, याद रहेगा न?”
“हाँ, भाई”
“मर्द बनके जाना, और दिल की बात केह आना”
“जी भईया, जी”

School की छुट्टी हो चूकी थी। तुम हर दिन के तरह अपने घर के तरफ निकल गयी थी। अपने धून में। ऐसा लग रहा था मानों वो सुरज भी लगातार बिना पलकें झुकाये तुम्हें ही देखा रहा हो। बस तुम्हें।

“बेटा, आज नहीं कहा इसे तो कभी नहीं केह पाएगा”

मैं तुम्हारे तरफ बड़ा। दिल साला 2000 Horse power वाले Engine कि तरह धड़क रहा था।

“सुनो….” “अरे सुनो…”
“Oh.. Hi Rahul.. क्या हुआ?”
“अरे वो.. Actually.. Akanksha मुझे कुछ कहना था तुमसे..”
“हाँ बोलो..”

मेरा हाथ मेरी पैंट की दायें जेब के तरफ बड़ा, गुलाब के लिए।
मगर अचानक ही दिल थम गया। ऐसा महसूस हुआ था मानों दुनिया पलट गई हो। गुलाब लेना भूल गया था मैं।

“अरे बोलो?” “क्या हुआ? क्या ढूंढ रहे जेब मैं?”
अब मेरे पास तेरे किसी भी सवाल का जवाब नहीं था।
“नहीं नहीं, कुछ नहीं ढूंढ रहा, वो Actuallyये कहना था की तुम्हारी वो Presentation बहुत अच्छी थी, Congrats”
“Oh..Thank You”

ये केह कर मैं वहाँ से सर झुका कर चल दिया था लेकिन अचानक तुम्हारी आवाज़ ने रोक लिया,

“सुनो रे Duffer,  अगर गुलाब भूल गए हो तो कोई बात नहीं, जो कहना है वो तुम ऐसे भी केह सकते हो। गुलाब से फर्क नहीं पड़ता मुझे”

❤ ❤

“पंख खोलते हैं”

ओ रे इंसान तू क्यों रुका है?
किन शर्तों से तू बंधा है?
चल आज हवाओं का रूख मोड़ते हैं।
आ, आज अपन पंख खोलते हैं।।

हालातों से न तू डर,
तेरे अंदर हैं वो सारे हुनर,
दिल लगा के तो देख तू एक बार ,
कसम खुदा की झुक जाएगा वो आसमां भी हजार बार।।

हिम्मत कर, रोना छुट जाएगा
कदम बड़ा, उस ईश्वर का  सर भी झुक जाएगा
समाज की बंदिश तोड़ के तो देख
तेरे दुश्मन का दिल भी तू जित जाएगा ।।

क्यों कुंठित कर रखा है तुमने अपने आप को?
क्यों भरते नहीं “जिगर” से अपने सपनों को?
चल आज हवाओं का रूख मोड़ते हैं।
आ, आज बस एक बार, खुद के लिए नहीं तो खुदा के लिए ,अपन पंख खोलते हैं।।

“Type” & “Erase”

He sat in the corner,
The library full of people,
Wanting to express,
All he did
Was “Type” and “Erase”

Thoughts bombarded him,
His mind almost blown,
With Love, Anger, Fear and what not,
He typed a few words,
To atlast,
“Type” and “Erase”

He watched them,
They watched him,
He searched for a ‘motivation’
They searched for a ‘reason’
He started with “Them”
Only , yet again,

To “Type” and “Erase” 

🙂