“….अब वो बात नहीं रही”

यूँही कभी आराम से बैठ अपने ही जनरेशन को निहारता हूँ तो अफ़सोस और दुःख दोनों भावों के नदी खुद के बांधों को तोर कर बह जाती हैं| आज से १०-१५ साल पहले तक कॉलेज के लड़के decisive हुआ करते थे, हिम्मती, जुनूनी, मेहनती और संकल्पि भी, लेकिन अब यह सब सपनो की बातें भर रह गयी हैं| कैंटीनो में बैठ, एक समोसे और एक चाय पर सरकार की नीतियों और समाज की परिस्थितियों को नाप जाने वाले लोग थे वो, दोस्ती भी सायद उस वक्त की ही सच्ची हुआ करती थी, अब दोस्ती नहीं केवल “social acquaintance” होती है | वो युग था जब पढाई किताब और कॉपी लेकर हुआ करती थी, वही सायद असली पढाई थी | यकीन नहीं होता तो अपने किसी बड़े भाई या बेहेन को ही देख लें, आज भी वह आपसे दस गुना ज्यादा सचेत होंगे |

अब की जनरेशन एक “आराम-पसंद” युग मात्र रह गयी है| किसी भी काम को उस काम के होने के खातिर नहीं किया जाता, उस काम को एक “फोटो-op” की तरह किया जाता है | फेसबुक और इन्स्ताग्राम के इस जनरेशन में काम वही  किया जाता है जिसकी तस्वीर ली जा सकती और फिर उस काम की सफलता इस बात से नापी जाती है की सोशल मीडिया पर उस तस्वीर पर कितने लाइक्स मिले| गली, मोहाल्ले के हुडदंगी अब दीखते नहीं, और दिखे भी तो कैसे, सब अपने अपने रूम पर बैठ विडियो गेम खेल रहे| इस breakup और patchup के युग में आशिकों के quality में भी गिरावट है, प्रेम पत्र वाले आशिक अब मिलते नहीं| देश दुनिया की खबरें तो गलती से ही सुनने को मिलती ही, खबर इन्हें वही पता होती है जो फेसबुक के फीड पर दिखती है| “Selfie” का जनरेशन है यह | बेमतलब बतक की तरह होंठ करने का जनरेशन है यह| दिशाहीन यूथ है ये| सही मायने में कहें तो अब वो बात ही नहीं रही,बिलकुल भी नहीं रही |

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s